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शुक्रवार, 28 जनवरी 2022

पूजा करते समय यह चीज गिर जाए तो समझो साक्षात साईं भगवान खड़े हैं पास विशेष संकेत

 जय साईं राम स्वागत है आप सभी का आपके अपने चैनल पर तो जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम सभी बाबा को प्रतिमा पर मूर्ति पर माला चढ़ाते हैं घर की पूजा में भगवान को माला चढाते हैं फूल चढ़ाते हैं और धोखे से जब वह माला गिर जाता है तो हम चिंतित हो जाते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ क्या है इसका संकेत क्या कहीं भगवान् हमसे नाराज हैं या बाबा हमसे गुस्सा है या कुछ और तरह-तरह के खेल हमारे दिल में दिमाग में चलते रहते हैं कि आखिर इसका क्या वजह हो सकता है कि जिसके कारण यह मसाला हमारा चढ़ाया हुआ जो गिर गया इन्हीं बातों को लेकर बाबा के एक भक्त ने आज कमेंट किया है जिनका नाम है कि आखिर सिंह जिन्होंने कमेंट किया है कि हम 9 गुरूवार से साईं बाबा का व्रत मन्नत मांगे हैं और मेरे पास गुरुवार का व्रत हुआ है इन पांच गुरुवार में जब हम पूजा करने बैठते हैं और जब व्रत करना प्रारंभ करते हैं तो हर गुरुवार को साईं बाबा के फोटो से चढ़ा हुआ माला गिर जाता है इसका क्या संकेत है तो देखिए मैं आपको बताना चाहूंगा कि बाबा या भगवान जिसके लिए पूजा करते व्रत करते हैं व्रत के दौरान पूजा के दौरान अगर आपके द्वारा चढ़ा वर्क फूल माला अगर गिरता है तो इसका यह संकेत है कि एक सकती जिस शक्ति के पूजा कर रहे हैं जो बारिश से आप अवश्य करें बाबा वह आपके आसपास है और आपकी प्रार्थना सुन रहे हैं आपकी मनोकामना सुन रहे हैं और आपके ऊपर अपनी अपार कृपा बनाए रखे हुए हैं इस कारण इसके यही संकेत है कि बाबा आपसे पसंद है और आपकी मनोकामना बहुत जल्द पूरी होने वाली है हम जब भी मंदिर में भी जाते हैं जब माता के कि है तो अचानक प्रतिमा से माला फूल गिर जाता है हमारे ऊपर गिर जाता है यह हमारे क्वालिटी गिर जाता है इससे यही संकेत है कि भगवान आपकी भक्ति से प्रसन्न है और आपकी अपनी अपार कृपा करने वाले हैं तो आप सभी को यह जानकारी अच्छी लगी हो तो आप वीडियो को लाइक करें चैनल पर नए सब्सक्राइब करें और बैल आइकॉन ऑपरेशन जरूर करें हम मिलेंगे अगली बार एक नई वीडियो के साथ तब तक के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ओम साईं

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

 क्या हुआ जब गंगा स्नान कर रहे ,भक्त की जान बचाने स्वयं महादेव पहुंच गए 'फिर जो हुआ उसे देखकर सभी लोगों के रोंगटे खड़े हो गए,

 हर हर महादेव नमस्कार दोस्तों हमारे YouTube चैनल में आप सभी लोगों का हार्दिक स्वागत है. यदि कोई भी भक्त दिल से महादेव पर विश्वास रखता है. तो महादेव उसका विश्वास टूटने नहीं देते ऐसी ही सच्ची घटना राजस्थान के चरणीय गांव में रहने वाले कमलेश जी और उनकी मां के साथ घटित हुई. कमलेश जी वैसे तो महादेव के बहुत बड़े भक्त है .


 लेकिन कमलेश जी जब गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं तभी अचानक वहां पर पानी का बहाव बहुत ही तेज हो जाता है ,और उसी में महेश जी डूबने लग जाते हैं, महेश जी की बूढ़ी मां यह देखकर बहुत ही चिंतित हो जाती है, जल्दी से दौड़कर उसकी बूढ़ी मां लोगों से मदद मांगने लग जाती है. अब कमलेश जी की हालत बहुत ही बिगड़ने लग जाती है .पानी के बहाव में वह अचानक ही तैरने लग जाते हैं .परंतु कहते हैं ना भक्तों अगर आप पर महादेव का हाथ हो तो काल भी. आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

 तभी अचानक कमलेश जी को एक साधु का वहां पर हाथ बिक जाता है, कमलेश जी उस साधु का हाथ पकड़े पकड़े किनारे तक पहुंचते हैं किंतु जब उन्हें होश आ जाता है ,तो जब वहां पर देखते हैं तो वहां पर साधु गायब हो जाते हैं कमलेश जी और उनकी बुढ़ी मां यह समझ जाते हैं यह हमारा रक्षा कोई और नहीं बल्कि स्वयं महादेव ने किया है दोस्तों महादेव अपने भक्तों की रक्षा जरूर करते हैं बस हमारी आस्था और भक्ति उनके प्रति सच्ची होनी चाहिए आशा करता हूं आज की वीडियो आपको अच्छी लगी होगी अच्छी लगी होगी तो वीडियो को लाइक शेयर एंड सब्सक्राइब जरुर कीजिएगा,

 मिलेंगे अगली बार एक खास वीडियो के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद

शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2021

जब पागल बैल से अपने भक्त की जान बचाने साईं बाबा दौड़े चले आए , फिर जो हुआ हैरान कर देने वाला था

 हेलो दोस्तों आखिर इस दिन ऐसा क्या हुआ जब एक खतरनाक बैल से अपने भक्तों को बचाने स्वयं शिर्डी के साईं नाथ तोड़ लें फिर जो हुआ उसे देखकर वह भी हैरान हो गए नमस्कार दोस्तों हमारे YouTube चैनल में आप सभी का हार्दिक हार्दिक स्वागत है दोस्तों वैसे तो हम आप सभी को साईं बाबा के अनेक चमत्कार दिखाए सुना हैं पर इस वीडियो को देखकर आपके भी पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी तो दोस्तों इस वीडियो को शुरू से लेकर अंत तक जरुर देखिएगा इस वीडियो को देखने के बाद आप भी केवल यही कहेंगे इस यह भी भला मुमकिन है जी हां दोस्तों यह आज के समय में भी मुमकिन है वीडियो शुरू करने से पहले सच्ची श्रद्धा के साथ कमेंट बॉक्स में ओम साईं राम जरूर लिखिएगा इससे क्या है वीडियो के शुरूआती अच्छी होगी तो चलिए दोस्तों वीडियो शुरू करते हैं दोस्तों यह सच्ची घटना हमें भेज कि हरियाणा के फरीदाबाद में रहने वाले पुष्पेंद्र जी ने पुष्पेंद्र जी बताते हैं कि वह साईं बाबा का हर दिन पूजा भक्ति सच्चे मन से किया करते रहे हों कोई भी कार्य की शुरुआत करते तो सबसे पहले साईं बाबा की तस्वीर लगाकर सच्चे मन से अपनी आस्था व भक्ति के साथ साईं बाबा का पूजा करते उसके बाद ही वह कार्य प्रारंभ करते एक दिन की बात है जब उन्हें काम के सिलसिले में घर से बाहर जाना था वह कार में अपने काम के लिए निकल गए तभी अचानक एक बड़ा सा भयानक सब बैल उनकी तरफ वह बहुत तेजी से आते हुए देखा उससे अपनी और देखकर पुष्पेंद्र जी बहुत ही डर गए और अपनी कार तुरंत रोक दिए जब का रुक गई तभी उस खतरनाक बैल ने हमला करना चालू कर दिया वह उनके कार्य के चक्के को अपने सिंह से बहुत ही तेजी से झटके मार मार कर ऊपर उठाने लगा जिसे देखकर मैं काफी डर गए और बस फिर क्या था अपने मन साहिबा को सच्चे मन से याद करने लगे और कहने लगे कि हे साईं बाबा मेरे प्राणों की रक्षा करो फिर कुछ ऐसा चमत्कार हुआ जिसे अपनी आंखों से देखकर बहुत हैरान हो गए और उन्हें साईं बाबा के चमत्कारों में और भी अधिक आस्था बढ़ गई होता कुछ ऐसा है कि कुत्ता उनकी तरफ दौड़ते हुए आता है और बैल को भिगोकर भगा देता है और है तो लगा था यह बैल अब उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेगा लेकिन पता नहीं कहां से उस सुनसान जगह में एक कुत्ता उनकी प्राणों की रक्षा करने आ जाता है उन यह सब केवल और केवल साईं बाबा का चमत्कार लगा और उसी दिन के बाद उनकी आस्था साईं बाबा के प्रति और भी कई गुना अधिक बढ़ गए दोस्तों आपको क्या लगता है यह स्वयं शिर्डी के साईं नाथ का चमत्कार था या फिर कुछ और नीचे हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा अगर आपको वीडियो अच्छी लगी हो तो इस वीडियो को लाइक कीजिएगा शेयर कीजिए का यह and चैनल को सब्सक्राइब कीजिए झाल इसे होगा क्या हमारी सभी आने वाली लेटेस्ट वीडियो आपको सबसे पहले मिलेगी तो भक्तों मिलेंगे अगले वीडियो में तब तक के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

सोमवार, 20 जनवरी 2020

साईं वाणी भाग 6 भ्रम निवारण Sai Vani Part 6 Confusion prevention

                                              नीच संग सब जानिए , सुनी लखि तुलसीदास,|
                                             ढील देत भुई गिरी परत,खेचत चढ़त अकाश ||

साईं बाबा ने कहा था किसी व्यक्ति के विषय में भ्रम निवारण करना हो, तो जो व्यक्ति आपसे दूसरों की रहस्य की बातें कहता है ,उसको कभी अपना भी रहस्य बता कर देखो, और उससे कहो कि किसी को कहे, नहीं संभव हो सकता है, वह एक दूसरे के रहस्य ही कहता घूमता हो, किसी का उपकार करके तो देखिए कि वह कृतघ रहता  है या कृतघन हो जाता है, किसी की गलतियां पकड़ कर देखिए कि वह सच्चे आदमी की तरह अपनी गलती मानता है या बातों से उसे ढकने की चेष्टा करता है, या अपनी गलती के कारण आपको अपना शत्रु तो नहीं मानता इन प्रयोगों से आप बहुतों के संबंध में भ्रम निवारण कर सकते हैं,
                                                            जय साईं राम
साईं बाबा आपका भला क'रें साईं की यह वाड़ी ने आपके दिल को छुआ हो तो इस ब्लॉगर को फॉलो जरूर करें और साईं जीवन माला यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें '
                                                                  ओम साईं राम



Know all with low, Suni Lakhis Tulsidas |
                                             Dheel dhat bhui giri layer, khechat chhatat akash ||



Sayin Baba said that if you want to eliminate confusion about a person, then the person who tells you the secrets of others, never tell him your secret, and tell him to tell someone, it is not possible, He goes around telling each other's secrets, seeing someone's gratitude, see if he is ungrateful or ungrateful, catch someone's mistakes and see if he believes his mistake like a true man or by talking He tries to cover it, or does not consider you his enemy due to his mistake, these experiments can help you in confusing many,

                                                            Jai sai ram

Say goodbye to Sai Baba, if this Wadi of Sai has touched your heart, then follow this blogger and subscribe to Sai Jeevan Mala YouTube channel.

                                                                  Om Sai Ram

शुक्रवार, 2 मार्च 2018

इंसान और भगवान

इंसान और भगवान

एक बार एक गरीब किसान एक अमीर साहूकार के पास आया, और उससे बोला कि आप अपना एक खेत एक साल के लिए मुझे उधार दे दीजिये। मैं उसमें मेहनत से काम करुँगा, और अपने खाने के लिए अन्न उगाऊंगा।

अमीर साहूकार बहुत ही दयालु व्यक्ति था। उसने किसान को अपना एक खेत दे दिया, और उसकी मदद के लिए 5 व्यक्ति भी दिए। साहूकार ने किसान से कहा कि मैं तुम्हारी सहायता के लिए ये 5 व्यक्ति दे रहा हूँ, तुम इनकी सहायता लेकर खेती करोगे तो तुम्हे खेती करने में आसानी होगी।

साहूकार की बात सुनकर किसान उन 5 लोगों को अपने साथ लेकर चला गया, और उन्हें ले जाकर खेत पर काम पर लगा दिया। किसान ने सोचा कि ये 5 लोग खेत में काम कर तो रहे हैं, फिर मैं क्यों करू? अब तो किसान दिन रात बस सपने ही देखता रहता, कि खेत में जो अन्न उगेगा उससे क्या क्या करेगा, और उधर वे पाँचो व्यक्ति अपनी मर्जी से खेत में काम करते। जब मन करता फसल को पानी देते, और अगर उनका मन नहीं करता, तो कई दिनों तक फसल सुखी खड़ी रहती।

जब फसल काटने का समय आया, तो किसान ने देखा कि खेत में खड़ी फसल बहुत ही ख़राब है, जितनी लागत उसने खेत में पानी और खाद डालने में लगा दी खेत में उतनी फसल भी खेत में नहीं उगी। किसान यह देखकर बहुत दुखी हुआ।

एक साल बाद साहूकार अपना खेत किसान से वापिस माँगने आया, तब किसान उसके सामने रोने लगा और बोला आपने मुझे जो 5 व्यक्ति दिए थे मैं उनसे सही तरीके से काम नहीं करवा पाया और मेरी सारी फसल बर्बाद हो गयी। आप मुझे एक साल का समय और दे दीजिये मैं इस बार अच्छे से काम करूँगा और आपका खेत आपको लौटा दूँगा।

किसान की बात सुनकर साहूकार ने कहा- बेटा यह मौका बार बार नहीं मिलता, मैं अब तुम्हें अपना खेत नहीं दे सकता। यह कहकर साहूकार वहाँ से चला गया, और किसान रोता ही रह गया।

दोस्तों अब आप यहाँ ध्यान दीजिये –

वह दयालु साहूकार “भगवान” हैं

गरीब किसान “हम सभी व्यक्ति” हैं

साहूकार से किसान ने जो खेत उधार लिया था, वह हमारा “शरीर” है

साहूकार ने किसान की मदद के लिए जो पांच किसान दिए थे, वो है हमारी पाँचो इन्द्रियां “आँख, कान, नाक, जीभ और मन”

भगवान ने हमें यह शरीर अच्छे कर्मो को करने के लिए दिया है, और इसके लिए उन्होंने हमें 5 इन्द्रियां “आँख, कान, नाक, जीभ और मन” दी है। इन इन्द्रियों को अपने वश में रखकर ही हम अच्छे काम कर सकते हैं ताकि जब भगवान हमसे अपना दिया शरीर वापिस मांगने आये तो हमें रोना ना आये।
🌻🌻🌻🌻

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

(((( काबिलियत ))))

                (((( काबिलियत ))))

. आप में भी कुछ करने की काबिलियत है,  कुछ करना चाहते हैं,  कुछ नाम शोहरत कमाना चाहते हैं,  और अपने  जन्म को सफल बनाना चाहते हैं, तो अपने अंदर की काबिलियत को जगाये
  देखें 1 दिन सफलता आपके कदमों में होगी,



 इस पोस्ट में हम आपको एक छोटी सी कहानी बता रहे हैं,  अच्छा लगे तो कमेंट और हमें फॉलो जरूर करें,
किसी जंगल में एक बहुत बड़ा तालाब था . तालाब के पास एक बागीचा था ,
.
जिसमे अनेक प्रकार के पेड़ पौधे लगे थे. दूर- दूर से लोग वहाँ आते और बागीचे की तारीफ करते .
.
गुलाब के पेड़ पे लगा पत्ता हर रोज लोगों को आते-जाते और फूलों की तारीफ करते देखता,
.
उसे लगता की हो सकता है एक दिन कोई उसकी भी तारीफ करे.
.
पर जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने उसकी तारीफ नहीं की तो वो काफी हीन महसूस करने लगा .

.     
उसके अन्दर तरह-तरह के विचार आने लगे—” सभी लोग गुलाब और अन्य फूलों की तारीफ करते नहीं थकते पर मुझे कोई देखता तक नहीं ,
.
शायद मेरा जीवन किसी काम का नहीं
.
कहाँ ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं… और ऐसे विचार सोच कर वो पत्ता काफी उदास रहने लगा.
.
दिन यूँही बीत रहे थे कि एक दिन जंगल में बड़ी जोर-जोर से हवा चलने लगी और देखते-देखते उसने आंधी का रूप ले लिया.
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बागीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे , देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर कर निढाल हो गए ,
.
पत्ता भी अपनी शाखा से अलग हो गया और उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा.
.
पत्ते ने देखा कि उससे कुछ ही दूर पर कहीं से एक चींटी हवा के झोंको की वजह से तालाब में आ गिरी थी और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी.

.   
चींटी प्रयास करते-करते काफी थक चुकी थी और उसे अपनी मृत्यु तय लग रही थी कि तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी,
.
घबराओ नहीं, आओ, मैं तुम्हारी मदद कर देता हूँ, और ऐसा कहते हुए अपनी उपर बैठा लिया.
.
आंधी रुकते-रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुँच गया; चींटी किनारे पर पहुँच कर बहुत खुश हो गयी और बोली,
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आपने आज मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है, सचमुच आप महान हैं,
.
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! “
.
यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया और बोला,” धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए, क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ ,
.
जिससे मैं आज तक अनजान था. आज पहली बार मैंने अपने जीवन के मकसद और अपनी ताकत को पहचान पाया हूँ
.
मित्रों , ईश्वर ने हम सभी को अनोखी शक्तियां दी हैं ; कई बार हम खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं और समय आने पर हमें इसका पता चलता है,

.       
हमें इस बात को समझना चाहिए कि किसी एक काम में असफल होने का मतलब हमेशा के लिए अयोग्य होना नही है .
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खुद की काबिलियत को पहचान कर आप वह काम कर सकते हैं , जो आज तक किसी ने नही किया है !


रविवार, 14 जनवरी 2018

----------------Respect our Parents---------------

                                    
       सच्चा है जिसका ईमान ,ऊंची है जिसकी शान ,,
                                    जो मानते है, अपने माँ ,बाप को "भगवान" 
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लेखक -लवलेश गुप्ता [राम ] की कलम से 

लोग कहते है हमे ऊपर वाले ने भेजा हे, माँ बाप तो केवल जन्म के साथी है ,अगर आप ऐसा सोचते है, तो ये गलत है अगर हमारे माँ बाप नहीं होते तो हम कहाँ से आते इस दुनिया में आज हम जो भी है, माँ बाप के बदौलत ही है,माँ ९ महीना अपनी कोख मै रख कर  हमे पालती है उस 9 महीने का दर्द और तकलीफ को वो ही जानती  है  , माँ बाप हमे   सहारा दे कर  चलना सिखाते  है, पर आज की युवा पीढ़ी अपंने माँ बाप को यह कहते है, की तुमने हमारे लिए क्या किया हम जो है अपनी मेहनत से है ,यह सोच को बदलना बहुत जरूरी है ,आप यह क्यों भूल जाते है की एक दिन आप भी तो माँ बाप बनेगे, माँ बाप का आदर सम्मान करे जिस प्रकार स्कूल लाइफ दुबारा नहीं मिलती ,जहां  आप अपना बचपन गुजारते है ,उसी तरह माँ बाप भी दुबारा नहीं मिलेंगे  




मेरा मकशद किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाना  नहीं है
यह  एक  छोटी सी स्टोरी है,
  अपने माता पिता की ख़ुशी के लिए जरूर पढ़े 
धन्यवाद 





एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे दूसरे खाना खा रहे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे, लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था। खाने के बाद बिना किसी शर्म के बेटा, वृद्ध को वॉश रूम ले गया।
                                   
 उनके कपड़े साफ़ किये, उनका चेहरा साफ़ किया, उनके बालों में कंघी की,चश्मा पहनाया और फिर बाहर लाया।

                                                  
                               


सभी लोग खामोशी से उन्हें ही देख रहे थे।बेटे ने बिल पे किया और वृद्ध के साथ बाहर जाने लगा।
तभी डिनर कर रहे एक अन्य वृद्ध ने बेटे को आवाज दी और उससे पूछा " क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहाँ
अपने पीछे तुम कुछ छोड़ कर जा रहे हो ?? "

बेटे ने जवाब दिया" नहीं सर, मैं कुछ भी छोड़ कर

नहीं जा रहा। "    
                        

                            वृद्ध ने कहा " बेटे, तुम यहाँ छोड़ कर जा रहे हो,
प्रत्येक पुत्र के लिए एक शिक्षा (सबक) और प्रत्येक पिता के लिए उम्मीद

(आशा)। "


                                  आमतौर पर हम लोग अपने बुजुर्ग माता पिता को अपने साथ बाहर ले जाना पसंद नहीँ करते
और कहते हैं क्या करोगे आप से चला तो जाता
नहीं ठीक से खाया भी नहीं जाता आप तो घर पर ही रहो वही अच्छा होगा.                        

                                                   
क्या आप भूल गये जब आप छोटे थे और आप के माता पिता आप को अपनी गोद मे उठा कर ले जाया करते थे,
आप जब ठीक से खा नही पाते थे तो माँ आपको अपने हाथ से खाना खिलाती थी और खाना गिर जाने पर डाँट नही प्यार जताती थी

                                                  फिर वही माँ बाप बुढापे मे बोझ क्यो लगने लगते हैं???
माँ बाप भगवान का रूप होते है उनकी सेवा कीजिये और प्यार दीजिये...
क्योंकि एक दिन आप भी बूढ़े होगें।

                                    Respect our Parents.. 

  आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आप सभी इसे शेयर जरूर करे शायद इस पोस्ट को पढ़कर किसी बेटे को माँ बाप का ख्याल आ जाये 





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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

पापा की परी है बेटी

                -----------------------  पापा की परी है बेटी-------------------
                                 
.पापा और बेटी की एक प्यारी सी कहानी हम आप के सामने पेश कर रहे है, आप सभी जानते है बेटी पराया धन होती  है,एक दिन बेटी अपना प्यारा सा घर छोड़ कर चली जाती है और अपने पति के घर की सोभा बन जाती है आप अपनी बेटी को इतना प्यार करे की वो जहां भी रहे खुश रहे ,
बेटी ने अपने पापा के लिए कुछ बनाया हे आगे पोस्ट पढ़े --


 "पापा मैंने आपके लिए खीर  बनाया है" 11साल की बेटी अपने पिता से बोली जो कि अभी office से घर आये ही थे ! ,


पिता "वाह क्या बात है ,ला कर खिलाओ फिर पापा को,"

बेटी दौड़ती रसोई मे गई और बडा कटोरा भरकर खीर  लेकर आई ..
पिता ने खाना शुरू किया और बेटी को देखा ..
पिता की आँखों मे आँसू थे...

-क्या हुआ पापा  खीर अच्छा नही लगा

पिता- नही मेरी बेटी बहुत अच्छा बना है ,

और देखते देखते पूरा कटोरा खाली कर दिया; इतने मे माँ बाथरूम से नहाकर बाहर आई ,
और बोली- "ला मुझे भी खिला तेरा खीर"



पिता ने बेटी को १००  रु इनाम मे दिए , बेटी खुशी से मम्मी के लिए रसोई से खीर लेकर आई मगर ये क्या जैसे ही उसने खीर की पहली चम्मच मुंह मे डाली तो तुरंत थूक दिया और बोली- "ये क्या बनाया है, ये कोई खीर है, इसमें तो चीनी नही नमक भरा है , और आप इसे कैसे खा गये ये तो जहर हैं , मेरे बनाये खाने मे तो कभी नमक मिर्च कम है तेज है कहते रहते हो ओर बेटी को बजाय कुछ कहने के इनाम देते हो...."

पिता-(हंसते हुए)- "पगली तेरा मेरा तो जीवन भर का साथ है, रिश्ता है पति पत्नी का जिसमें नौकझौक रूठना मनाना सब चलता है; मगर ये तो बेटी है कल चली जाएगी, मगर आज इसे वो एहसास वो अपनापन महसूस हुआ जो मुझे इसके जन्म के समय हुआ था। आज इसने बडे प्यार से पहली बार मेरे लिए कुछ बनाया है, फिर वो जैसा भी हो मेरे लिए सबसे बेहतर और सबसे स्वादिष्ट है; ये बेटियां अपने पापा की परियां , और राजकुमारी होती है जैसे तुम अपने पापा की हो ..."



वो रोते हुए पति के सीने से लग गई और  सोच रही थी
इसीलिए हर लडकी अपने  ससुरल में सास ससुर में और पति  मे अपने पापा की छवि ढूंढती है..

दोस्तों यही सच है हर बेटी अपने पिता के बडे करीब होती है या यूं कहे कलेजे का टुकड़ा इसीलिए शादी मे विदाई के समय सबसे ज्यादा पिता ही रोता है ....

इसीलिए हर पिता हर समय अपनी बेटी की फिक्र करता रहता है ! 
बेटी बचपन में अपने माता पिता की लाड़ली होती है ,जब वह अपने पति के घर जाती हैं. तो उसका नया जन्म  होता है। फिर वह ससुराल मै अपने  ससुर और पति मै पिता की छवि को देखती है ,



जो प्यार बच्चपन मै उसे अपने माता पिता से मिला है, वही प्यार अपने ससुराल में अपने पति और पिता से चाहती है 
जो  प्यार उसे बचपन में अपने माता पिता के साथ मिला वही ससुराल में मिलेगा तो किसी बेटी को अपने माता पिता की कमी कभी महशूश नहीं होगी वही अपने पिता की लाड़ली परी होगी हर पिता की यही चाहत होती है की मेरी बेटी जहाँ भी रहे खुश रहे ,



अच्छा लगे तो शेयर करे


आपका 
  
राम गुप्ता [लवलेश ]


शनिवार, 6 जनवरी 2018

माँ झूठ बोलती है..

माँ झूठ बोलती है.....

सुबह जल्दी उठाने सात बजे को आठ कहती
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है,
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती
छोटी परेशानियों का बड़ा बवंडर करती है




 ...
.......माँ बड़ा झूठ बोलती है




थाल भर खिलाकर तेरी भूख मर गयी कहती है
जो मैं न रहू घर पे तो मेरे पसंद की
कोई चीज़ रसोई में उनसे नही पकती है,
मेरे मोटापे को भी कमजोरी की सूज़न बोलती है
..........माँ बड़ा झूठ बोलती है

माँ झूठ बोलती है.....

सुबह जल्दी उठाने सात बजे को आठ कहती
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है,
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती
छोटी परेशानियों का बड़ा बवंडर करती है

....माँ बड़ा झूठ बोलती है

थाल भर खिलाकर तेरी भूख मर गयी कहती है
जो मैं न रहू घर पे तो मेरे पसंद की
कोई चीज़ रसोई में उनसे नही पकती है,
मेरे मोटापे को भी कमजोरी की सूज़न बोलती है

..........माँ बड़ा झूठ बोलती है

दो ही रोटी रखी है रास्ते के लिए बोल कर
एक मेरे नाम दस लोगो का खाना भरती है,
कुछ नही-कुछ नही, बोल नजर बचा बैग में
छिपी शीशी अचार की बाद में निकलती है

.......माँ बड़ा झूठ बोलती है

टोका टाकी से जो मैं झुंझला जाऊ कभी तो,
समझदार हो अब न कुछ बोलूंगी मैं,
ऐसा अक्सर बोलकर वो रूठती है
अगले ही पल फिर चिंता में हिदायती होती है

........माँ बड़ा झूठ बोलती है

तीन घंटे मैं थियटर में ना बैठ पाउंगी,
सारी फिल्मे तो टी वी पे आ जाती है,
बाहर का तेल मसाला तबियत खराब करता है
बहानो से अपने पर होने वाले खर्च टालती है

 ........माँ बड़ा झूठ बोलती है

मेरी उपलब्द्धियो को बढ़ा चढ़ा कर बताती
सारी खामियों को सब से छिपा लेती है
उनके व्रत ,नारियल,धागे ,फेरे मेरे नाम
तारीफ़ ज़माने में कर बहुत शर्मिंदा करती है

........ माँ बड़ा झूठ बोलती है

भूल भी जाऊ दुनिया भर के कामो में उलझ
उनकी दुनिया मैं वो मुझे कब भूलती है, ?
मुझ सा सुंदर उन्हें दुनिया में ना कोई दिखे
मेरी चिंता में अपने सुख भी नही भोगती है

.........माँ बड़ा झूठ बोलती है

मन सागर मेरा हो जाए खाली ऐसी वो गागर
जब पूछो अपनी तबियत हरी बोलती है,
उनके ‘जाये” है, हम भी रग रग जानते है
दुनियादारी में नासमझ वो भला कहाँ समझती है

........माँ बड़ा झूठ बोलती है

उनकी फैलाए सामानों से जो एक उठा लू
खुश होती जैसे उन पे उपकार समझती है,
मेरी छोटी सी नाकामयाबी पे गहरी उदासी
सोच सोच अपनी तबियत का नुक्सान सहती है

........माँ बड़ा झूठ बोलती है ।।

दो ही रोटी रखी है रास्ते के लिए बोल कर
एक मेरे नाम दस लोगो का खाना भरती है,
कुछ नही-कुछ नही, बोल नजर बचा बैग में
छिपी शीशी अचार की बाद में निकलती है

.......माँ बड़ा झूठ बोलती है
टोका टाकी से जो मैं झुंझला जाऊ कभी तो,
समझदार हो अब न कुछ बोलूंगी मैं,
ऐसा अक्सर बोलकर वो रूठती है
अगले ही पल फिर चिंता में हिदायती होती है



........माँ बड़ा झूठ बोलती है 


तीन घंटे मैं थियटर में ना बैठ पाउंगी,
सारी फिल्मे तो टी वी पे आ जाती है,
बाहर का तेल मसाला तबियत खराब करता है
बहानो से अपने पर होने वाले खर्च टालती है

 ........माँ बड़ा झूठ बोलती है

मेरी उपलब्द्धियो को बढ़ा चढ़ा कर बताती
सारी खामियों को सब से छिपा लेती है
उनके व्रत ,नारियल,धागे ,फेरे मेरे नाम
तारीफ़ ज़माने में कर बहुत शर्मिंदा करती है

........ माँ बड़ा झूठ बोलती है

भूल भी जाऊ दुनिया भर के कामो में उलझ
उनकी दुनिया मैं वो मुझे कब भूलती है, ?
मुझ सा सुंदर उन्हें दुनिया में ना कोई दिखे
मेरी चिंता में अपने सुख भी नही भोगती है

.........माँ बड़ा झूठ बोलती है



मन सागर मेरा हो जाए खाली ऐसी वो गागर
जब पूछो अपनी तबियत हरी बोलती है,
उनके ‘जाये” है, हम भी रग रग जानते है
दुनियादारी में नासमझ वो भला कहाँ समझती है

........माँ बड़ा झूठ बोलती है

उनकी फैलाए सामानों से जो एक उठा लू
खुश होती जैसे उन पे उपकार समझती है,
मेरी छोटी सी नाकामयाबी पे गहरी उदासी
सोच सोच अपनी तबियत का नुक्सान सहती है

........माँ बड़ा झूठ बोलती है ।।

पूजा करते समय यह चीज गिर जाए तो समझो साक्षात साईं भगवान खड़े हैं पास विशेष संकेत

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