शुक्रवार, 5 जनवरी 2018

फ़क़ीर को "साईं" नाम कैसे प्राप्त हुआ?







फ़क़ीर को "साईं" नाम कैसे प्राप्त हुआ?

जब बारात शिरडी में पहुँची तो खंडोबा के मंदिर के समीप म्हालसापति के खेत में, तब बारात को एक वृक्ष के नीचे ठहराई गई। खंडोबा जी के मंदिर के सामने ही सब बैलगाड़ियाँ खोल दीं गई और बरात के सभी बाराती गण एक-एक करके सब लोग एक-एक करके नीचे उतरने लगे। 
उस रूपवान  और सूर्य के प्रकाश के जैसे तेजस्वी  चेहरे वाले तरुण फ़क़ीर को उतरते देखकर , म्हालसापति ने "आओ साईं " आओ साईं आओ साईं(मराठी में " या साईं !') कहकर उनका अभिनन्दन किया तथा अन्य उपस्थित लोगों ने भी साईं नाम के जयकारे के साथ उस रूपवान तरुण फकीर को साईं नाम   ' शब्द से ही सम्बोधन कर उनका आदर किया। इसके पश्चात वे 'साईं ' नाम से ही प्रसिद्द हो गए।

तबसे
साईं बाबा का साईं नाम बहुत ही पतित और पावन है,  जो भी भक्त श्रद्धा से बाबा को पुकारता है  साईं दौड़े दौड़े चले आते हैं.  आप भी सुबह शाम हर पल साईं नाम का स्मरण जरूर करें,
बाबा आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेंगे.  यह हमारा अटूट विश्वास है इन्हीं आशाओं के साथ आप सभी को ओम साईं राम बाबा की कृपा आप सभी पर बनी रहे.

        राम गुप्ता (लवलेश)
सह सचिव श्री साई बाबा सेवा आश्रम
करगी रोड कोटा जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़
 स्थापित 1972 रजि नं 11025
सम्पर्क सूत्र-8602160984
                 9893744778

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद जो आपने बाबा की लीलाओं को पूरा पढा।
साई बाबा आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें


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